Noida news in hindi : आम्रपाली से लेकर सुपरटेक तक बीते पांच साल मे लगभग नोएडा के अंदर पाँच बिल्डर दिवालिया घोषित हो चुके हैं । इन दिवालिया बिल्डरों की वजह से लगभग डेढ़ लाख फ़्लैट बायर्स का भविष्य ख़तरे में है । फ़्लैट बायर्स वर्षों से कोर्ट कचहरी और अथॉरिटी के चक्कर काट रहे हैं पर उन्हें अभी तक कोई समाधान नहीं मिल पाया है । बिल्डर दिवालिया होकर अपने घर बैठे हुए हैं और बैंक कार्ट में केस लड़ रही है पर न तो सरकार और न ही कोर्ट अभी तक इस मामले का कोई हल निकाल पाए हैं । आज हम पिछले पाँच सालों में दिवालिया हुए बिल्डरों की एक एक करके पूरी कहानी समझेंगे और दिवालिया घोषित होने के पीछे क्या कोई साज़िश है इस बात को समझने की कोशिश करेंगे ।

1. आम्रपाली बिल्डर ( Amrpali Builders )

Noida news in hindi : भारत के दूसरे विजय माल्या और आम्रपाली ग्रुप के CMD अनिल शर्मा ने अगस्त 2017 में HDFC बैंक का 1000 करोड़ रुपये लौटाने से इनकार कर दिया जिसके बाद कहा जाने लगा कि आम्रपाली ग्रुप ख़ुद को दिवालिया घोषित करवाना चाहता है । 2017 में आम्रपाली ग्रुप पर 20, हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ था जिसमें एक हज़ार करोड़ रुपये HDFC बैंक के और 19, हज़ार करोड़ रुपये निवेशकों की देनदारी थी । इस प्रकरण के बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा NCLT पहुँच गया जहाँ पर NCLT ने आम्रपाली ग्रुप पर दिवालिया घोषित होने की प्रक्रिया शुरू कर दी । आम्रपाली ग्रुप पर बैंक ऑफ़ बड़ौदा का भी 97.30 करोड़ रुपये बकाया था । लेकिन इस सब प्रकरण के बाद भी आम्रपाली ग्रुप के 60 हज़ार फ़्लैट ख़रीदार अभी भी फ़्लैट मिलने की राह में बैठे हुए हैं आए दिन आंदोलन करते हैं लेकिन आज तक उन्हें इंसाफ़ न मिल सका ।

2. JP बिल्डर्स ( Jp Builders )

Noida news in hindi : ठीक दो महीने बाद JP बिल्डर्स भी नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल द्वारा दिवालिया घोषित कर दिया गया । दिवालिया घोषित करते हुए ट्रिब्यूनल ने JP बिल्डर को 270 दिन का समय दिया यह 270 दिन JP बिल्डर को अपनी स्थिति सुधारने के लिए दिए गए थे लेकिन इस अवधि में भी JP बिल्डर्स कुछ नहीं कर पाया और दिवालिया घोषित हो गया । ट्रिब्यूनल ने यह फ़ैसला IDBI बैंक की याचिका पर लिया था । उस समय ट्रिब्यूनल द्वारा 12 एकाउंट को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया के लिए चुना गया था जिसमें से JP बिल्डर भी एक था । JP बिल्डर पर कुल 8365 करोड़ रुपये का कर्ज़ था इसमें से सिर्फ़ 1200 करोड़ रुपये ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का था । JP बिल्डर ने भी 32, हज़ार फ़्लैट खरीदारों को दर-दर की ठोकर खाने के लिए छोड़ दिया ।

3.सुपरटेक बिल्डर्स (Supertech Builders)

Noida news in hindi : साल 2022 मार्च में NCLT द्वारा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (Union Bank of India) की याचिका पर सुपरटेक बिल्डर को भी दिवालिया घोषित कर दिया गया ।सुपरटेक द्वारा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का भुगतान न करने पर बैंक ने यह याचिका ट्रिब्युनल में दाख़िल की थी । NCLT की दिल्ली बेंच ने इस मामले में सुनवाई की थी । बाद में सुपरटेक ने बयान जारी करके कहा कि वह इस मामले में NCLAT का दरवाज़ा खटखटाएंगे क्योंकि यह मामला एक फ़ाइनेंशियल क्रेडिट से जुड़ा हुआ है ।सुपरटेक ने दावा करते हुए कहा कि पिछले सात सालों में हमने 40, हज़ार से ज़्यादा यूनिट डिलीवर करके शानदार रिकॉर्ड बनाया है और हम अपने बायर्स का भरोसा नहीं टूटने देंगे । हालाँकि सुपरटेक पर अभी 1200 करोड़ रुपये का कर्ज़ है और सुपरटेक में 25, हज़ार फ़्लैट बायर्स ऐसे हैं जो अभी अपने आशियाने का इंतज़ार कर रहे हैं । सुपरटेक की 11-12 परियोजनाएं ऐसी हैं जिनके विरुद्ध ये एक्शन लिया गया है । आम आदमी पार्टी ने सुपरटेक के दिवालिया घोषित होने में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और NCLT की साँठ गाँठ होने का आरोप लगाया है और कहा है कि कंपनी को फ़ायदा पहुँचाने के उद्देश्य से कम्पनी को दिवालिया घोषित किया गया है ।

4.लॉजिक्स बिल्डर (Logix Builders)

Noida news in hindi : सुपरटेक के दिवालिया घोषित होने के कुछ दिन बाद ही नोएडा की ही दूसरी कंपनी लॉजिक्स बिल्डर को भी NCLT द्वारा दिवालिया घोषित कर दिया गया । कोलियर्स इंटरनेशनल प्रॉपर्टी सर्विसेस ने NCLT में लॉजिक्स बिल्डर के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी । लॉजिक्स बिल्डर पर नोएडा अथॉरिटी का 500 करोड़ रुपये बकाया था । जिस परियोजना को लेकर कम्पनी NCLT गई थी उस परियोजना को लॉजिक्स बिल्डर 11 साल से पूरा नहीं कर सका है । लॉजिक्स बिल्डर ने ब्लॉसम ज़ेस्ट नाम की इस परियोजना को 2011 में लॉन्च किया था । इस परियोजना के अंतरगत 27 फ़्लैट ख़रीदार ऐसे हैं जिनका अब घर मिलने का सपना अधर में लटक गया है ।

इसके अलावा थ्रीसी बिल्डर भी NCLT द्वारा दिवालिया घोषित हो चुका है । इन सभी बिल्डरों के दिवालिया घोषित होने से दूर दराज़ इलाकों से नोएडा में आशियाने का सपना लेकर आए लोगों का सपना अधर में अटक गया है । लोगों ने अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई आशियाना ख़रीदने में लगा दी है और अब वह बैंकों की क़िस्त भर रहे हैं । फ़्लैट बायर्स परेशान है कोर्ट से उन्हें कोई समाधान नहीं मिल रहा है अथॉरिटी उन्हें रजिस्ट्री नहीं करवाने दे रही है क्योंकि कम्पनियों ने अथॉरिटी का पैसा नहीं दिया है । ऐसे में फ़्लैट ख़रीदार जाएं तो कहाँ जाएं ग्रेटर नोएडा में आए दिन फ़्लैट ख़रीदार धरना प्रदर्शन करते रहते हैं और सरकार से इस समस्या का समाधान करने की माँग करते रहते हैं ।

Ashutosh Mishra

News Activist , Political commentator and software engineer