Agra university : जब से आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की कुर्सी सँभाली है तब से शिक्षा का बुरा हाल है ।

अब एक ऐसा ही कारनामा इन्होंने डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल के साथ किया है । जो की उनके करीबियों से बात करने पर पता चलता है कि वह एक ईमानदार कर्मठ शिक्षाविद छात्रों व शिक्षकों के हितों को रक्षित करने वाले व उनके साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति हैं लेकिन राज्यपाल महोदया ने उनके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया है ।

प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल आगरा के भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के लगभग 16 महीने पहले कुलपति बनाए गए थे कुछ दिन पहले ही इन्हें भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का चार्ज लगाकर बर्खास्त कर दिया गया है ।

जबकि सच्चाई यह बतायी जा रही है कि जब से प्रोफ़ेसर ने ज्वाइन किया था तब से लेकर अब तक आगरा विश्वविद्यालय जो अपने भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात था उस पर बड़ा अंकुश लगाया । भ्रष्टाचार पर कितना लगाम लगा इससे समझा जा सकता है कि विश्वविद्यालय का 72 करोड़ का वार्षिक बजट घटकर लगभग आधा हो गया है ।

प्रोफ़ेसर अशोक मित्तल के कार्यकाल में कोई भी परमानेंट नियुक्ति नहीं हुई लेकिन इन पर आरोप लगा है की जब से इन्होंने विश्वविद्यालय ज्वाइन किया है तब से नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा हुआ है ।

इनके कार्यकाल के दौरान गैस टीचर पॉइंट हुए थे जिनमें 90 परसेंट वही पुराने टीचर जो पहले से ही पढ़ाते आ रही है उनको अपॉइंटमेंट किया गया था । इन पर आरोप है कि इन गेस्ट टीचर नियुक्त करने में फर्जीवाड़ा किया गया है ।

इनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र अंकपत्र इत्यादि ऐसे सारे कामों पर पाबंदी लगा दी गई जिससे वहाँ का गैलरी कल स्टॉप बिलकुल नाराज़ था लगभग 14 महीने इनके कार्यकाल करोना महामारी में बीत गए इस दौरान विश्वविद्यालय द्वारा ना परीक्षा कराई गई न ही कोई निर्माण कार्य हुए अधिकतर समय में विश्व विद्यालय बंद ही रहे फिर भी आरोप है कि इन्होंने निर्माण कार्यों में और परीक्षा में धाँधली की है ।

खास बात यह भी है की इनके टर्मिनेशन के दिन ही रात में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति को चार्ज दे दिया गया और उस कुलपति ने रात में ही आकर आगरा विश्वविद्यालय का चार्ज ग्रहण भी कर लिया। हास्यास्पद यह है कि जो न्यायिक कमेटी गठित की गई जो इनके भ्रष्टाचारो की जांच करेगी उनमें वह कुलपति को शामिल किया गया है जिन्होंने शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी के भाई का अपॉइंटमेंट अपने विश्वविद्यालय में कराया था।

पूरे प्रदेश में जहां विश्वविद्यालय के कुलपति के द्वारा लगातार भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार की खबरें आ रही हैं उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जबकि एक बेहद ईमानदार, कर्मठ, शिक्षाविद छात्रों व शिक्षकों को हितों को रक्षित करने वाले प्रोफ़ेसर के साथ यह अन्याय पूर्ण कार्य बहुत ही दुखदाई है।

अब शिक्षकों के हित की लड़ाई लड़ने वाले प्रोफ़ेसर अरविंद कुमार सिंह ने इन्हें इंसाफ़ दिलाने का बीड़ा उठाया है उन्होंने कहा कि चंदा चोरों की गैंग ने ऐसे बेहद ईमानदार, कर्मठ, शिक्षाविद छात्रों व शिक्षकों को हितों को रक्षित करने वाले प्रोफ़ेसर की शिक्षा का ईमानदारी का कार्यकुशलता की हत्या करना बंद करें और मुनेश्वर सम्मान उनके पद पर पुनः स्थापित किया जाए। सर अरविंद कुमार सिंह शिक्षा अधिकार समिति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जो शिक्षकों और छात्र हितों के लिए काम करते हैं ।