नोएडा। मूक बधिर छात्र-छात्राओं के मतांतरण के मामले में एटीएस को नोएडा डेफ सोसायटी के कई अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। सूत्रों के मुताबिक मामले का पर्दाफाश होने के बाद से कई शिक्षक व कर्मचारियों का मोबाइल नंबर बंद हैं। इसलिए जांच एजेंसी इन कर्मचारियों को संदिग्ध मान रही है। सभी से संपर्क साधने के लिए स्थानीय पुलिस की मदद ली गई है। मामले में पहले से संदिग्ध फरार शिक्षक व दो कर्मचारियों की तलाश जारी है।

सेक्टर-117 स्थित सोहरखा गांव से संचालित नोएडा डेफ सोसायटी के सेंटर पर पढ़ाई कर चुके करीब 60 मूक छात्र-छात्राओं का मतांतरण की बात सामने आई है, लेकिन जांच एजेंसी अबतक कानपुर व गुरुग्राम निवासी दो छात्र व दिल्ली निवासी एक छात्रा की जानकारी जुटा पाई है। अन्य छात्रों के दस्तावेज को कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। सेंटर पर दाखिले के दौरान छात्रों से जमा कराए गए पंजीकरण फार्म पर दर्ज मोबाइल नंबर व पते पर पुलिस के माध्यम से एक-एक छात्रों की डिटेल जुटाई जा रही है।

करीब 500 छात्र-छात्रों के दस्तावेज को कब्जे में लिया गया है। जांच एजेंसी को कई छात्रों के मोबाइल नंबर और पते भी गलत मिले हैं। जिससे उनसे संपर्क साधने में परेशानी हो रही है। इसलिए शक और गहराता जा रहा है। एटीएस ने पूर्व शिक्षक व कर्मचारियों की तलाश में दबिश दी है, लेकिन किसी का कुछ पता नहीं चल सका है। फरार शिक्षक व कर्मचारी ही मूक बधिर छात्रों को बहला फुसलाकर दिल्ली पहुंचाते थे।

वार्षिकोत्सव वीडियो की जांच शुरू

जांच एजेंसी को नोएडा डेफ सोसायटी के कुछ अहम वीडियो मिले हैं, जो सोसायटी के वार्षिकोत्सव के बताए जा रहे हैं। संस्थान का वार्षिकोत्सव 15 जून को मनाया जाता है। इन वार्षिकोत्सव के वीडियो में देश-विदेश के कई लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। इस मामले में संचालिका समेत अन्य पदाधिकारियों से पूछताछ की है। वीडियो की जांच की जा रही है और कार्यक्रम में खासतौर से विदेश से शामिल होने के लिए आए लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि वार्षिकोत्सव में किन-किन देशों और किन-किन राज्यों के लोग शामिल हुए हैं। उनके शामिल होने के क्या कारण है और किसके बुलावे पर वहां आए थे।

News Source : https://www.jagran.com/uttar-pradesh/noida-ncr-revealed-in-conversion-mobile-numbers-of-teachers-and-employees-of-noida-deaf-society-also-got-closed-21771222.html