नाेएडा। डाक्टर्स डे के दिन एक चिकित्सक के लिए मरीज का स्वस्थ होना सबसे बड़ा उपहार है। यह उपहार तब अनमोल हो जाता है जब मरीज स्वयं चिकित्सक को उनके कार्यों के लिए थैंक्यू बोले। कोरोना की दूसरी लहर में चिकित्सकों के संवेदनहीन होने के कई मामले सामने आए, लेकिन सेक्टर-39 कोविड अस्पताल के चिकित्सक डॉ. टीके सक्सेना ने पेशे के प्रति ईमानदारी व लगन से मौत के मुंह में जा चुके मरीज काे उन्हें धन्यवाद कहने के लिए मजबूर कर दिया। 62 दिन बाद जब मरीज अपने पैरों पर खड़ा हुआ तो डॉ. टीके सक्सेना भी भावुक हो गए और डाॅक्टर्स डे पर इसे अपनी जिंदगी का सबसे नायाब तोहफा बताया।

दिल्ली निवासी सुनील कुमार कोरोना संक्रमित होने के चलते 30 अप्रैल को सेक्टर-39 कोविड अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें सांस लेने में परेशानी, बुखार, खांसी आदि लक्षण थे। पल्स रेट 130 तक पहुंच गई थी और आक्सीजन सेचुरेशन 68 हो गया था। वेंटिलेटर स्पोर्ट पर भी मरीज का आक्सीजन लेवल 80 से ऊपर नहीं आ रहा था। अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने मरीज की हालत गंभीर देखते हुए केस चिकित्सक डॉ. तृतीय कुमार सक्सेना को दिया।

डॉ. टीके सक्सेना की देखरेख में संक्रमित सुनील कुमार 30 जून तक इलाज चला और डॉक्टर डे के दिन सुबह उन्हें बिल्कुल स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। चिकित्सक के अनुसार सुनील को स्ट्रेचर पर अस्पताल लाया गया था। उन्हें फेफड़ों में गंभीर संक्रमण व निमोनिया की शिकायत थी। निमोनिया बढ़ने से उन्हें (फाइब्रोसिस) की शिकायत बढ़ गई। फेफड़ों में फ्लयूड एकत्र होकर जम गया था, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई। उन्हें दो माह तक मशीनों पर रखा गया।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व संक्रमण को खत्म करने के लिए स्टेरायड व एंटीबायोटिक दवाइयां दी गई। जब वह अस्पताल में भर्ती हुए थे, तब यहां संक्रमितों की संख्या 300 थी, उस समय भर्ती होने वालों में वह अकेले संक्रमित बचे थे। डॉक्टर्स डे के दिन सुनील स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं, इससे बढ़कर खुशी एक चिकित्सक के लिए ओर क्या हो सकती है।

जाते वक्त सुनील बोले, डॉक्टर ने दिया जीवनदान, जिंदगी भर याद रहेंगे

कोरोना के संक्रमण के सामने दवाइयों का असर भी कमजोर पड़ने लगा था, उसके बाद भी चिकित्सक जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगे रहे। अपने परिवार की चिंता किए बगैर घंटों तक वार्ड में मेरा उपचार किया। खाना व दवा का विशेष ध्यान रखा। आज इन्हीं के बूते अपने पैरों पर खड़े होकर घर लौट रहा हूं। चिकित्सकों का यह सेवाभाव जिंदगी भर नहीं भूल पाउंगा।

पहली डोज के पंद्रह दिन बाद हुए थे संक्रमित

डॉ. टीके सक्सेना ने बताया कि टीकाकरण के बाद लोग निश्चिंत होकर घूम रहे हैं। सुनील पहली डोज लेने के पंद्रह दिन बाद संक्रमित हुए थे, उनकी जिंदगी बचाने के लिए चिकित्सकों को तमाम प्रयास करने पड़े। उन्होंने लोगों से मास्क, सैनिटाइजेशन व शारीरिक दूरी का पालन करने की अपील की है।

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