ज़िले के नवाबगंज शहर में बुधवार थमने का नाम नहीं ले रहा है बल्कि इसका कहर दिन व दिन बढ़ता जा रहा है । गुरुवार को नवाबगंज के सामुदायिक केंद्र में 18 बुखार पीड़ितों को भर्ती करवाया गया है लेकिन मरीज़ों को बेड न मिलने के कारण एक बेड पर दो दो मरीज़ों को लिटाना पड़ रहा है । मरीज़ों में डेंगू बुखार को लेकर ख़ासा दर नज़र आ रहा है पर यहाँ पर स्वास्थ्य की सुविधाएँ अपना दम तोड़ती नज़र आती है ।

आस पास के गांवों में बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा है पिछले 20 दिनों से बुखार का क़हर इस क़दर है कि हर घर में एक ना एक मरीज़ निकल रहा है । इससे पहले चार बुखार पीड़ितों की मौत भी हो चुकी है ।गुरुवार सीएचसी में गांव बरतल निवासी धर्मपाल की पत्नी कुसुमा, उनकी पुत्री सान्या, नेहा, बृजकिशोर की पत्नी अनीता, उनका पुत्र सुधांशु, सरस्वती पत्नी पंचम सिंह, ललिता पत्नी आलोक, शिल्पी पुत्री रामनिवास, श्यामा देवी पत्नी रामप्रताप, सुलोचना पत्नी सोनू, प्रेमा देवी पत्नी रामप्रकाश, सलोनी पुत्री शिवराम, बीरे लाल, सुशीला पत्नी श्रीनिवास, सर्वेशा देवी पत्नी सुरेश कुमार, रवेंद्र सिंह की पुत्री पूजा व नवाबगंज निवासी श्रीनिवास की पत्नी सुशीला, बरतल वाली गली निवासी जितेंद्र सिंह के पुत्र निखिल कुमार को बुखार से ग्रसित होने पर सीएचसी में भर्ती कराया गया।

डॉक्टर समेत जिला सामुदायिक केंद्र में इलाज कर रहे हैं मरीज़ों की लंबी लाइन लगी हुई है मरीज़ों की संख्या ज़्यादा होने के कारण 1 बेड पर दो दो मरीज़ों को लिटाया जा रहा है । जिससे मरीज़ों को ख़ासा असुविधा का सामना करना पड़ रहा है लोगों के मन में भय हैं । यही नहीं आस पास के गांवों में भी बुखार का क़हर बढ़ता जा रहा है । लोगों को इधर उधर जाकर निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ा रहा है । गुरुवार को रक्त जाँच शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 26 बुखार पीड़ितों का रख लिया गया जिसमे चार लोग मलेरिया पीड़ित निकले ।