होम आइसोलेशन में 90 फीसदी से ज्यादा लोग ऑक्सीजन सिलेंडर के इस्तेमाल को नहीं समझ पाते

शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होने से जा सकती है जान

अगर आप खुद या आपका कोई अपना करीबी होम आइसोलेशन में है तो यह खबर आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। पूरे देश में होम आइसोलेशन को लेकर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। होम आइसोलेशन में मरीजों के प्राथमिक उपचार संबंधी दवाएं और मरीजों के के गिरते हुए ऑक्सीजन लेवल को ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे बढ़ाने की तमाम जानकारियां केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित भी की हैं। लेकिन इस प्रचार प्रसार में बहुत सी अधूरी जानकारियों की वजह से लोग होम आइसोलेशन में अपने मरीज की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

दरअसल होम आइसोलेशन की प्रक्रिया में सबसे तकनीकी काम सामान्य लोगों को गैस सिलेंडर के माध्यम से मरीज को ऑक्सीजन पहुंचाने की होता है और लोगों को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि ऑक्सीजन का इस्तेमाल किस तरह और कैसे किया जाए। नतीजा यह होता है कि जानकारी के अभाव में मरीजों की जान से खिलवाड़ होता है। देश के कई अस्पतालों में ऐसे ही घर पर दी जाने वाली ऑक्सीजन से दुर्घटनाएं भी रिपोर्ट हो रही हैं। अमर उजाला डॉट कॉम ने इस बारे में देश के जाने-माने डॉक्टरों से होम आइसोलशन में कब, क्या और कैसे दवाओं से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करना है, यह जानने की कोशिश की।

कहने में सरल लेकिन सबसे जटिल काम है ऑक्सीजन देना होम आइसोलेशन में मरीज के गिरते हुए ऑक्सीजन लेवल को आप ऑक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से बढ़ा सकते हैं। देशभर में लोगों के मोबाइल में इस तरीके के मैसेजे की भरमार है। सवाल यह कि ऑक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से हमें किस लेवल पर जाकर और कितनी मात्रा में मरीज को ऑक्सीजन देनी है और उसकी निगरानी कैसे करनी है। इसका किसी सोशल मीडिया पर राज्य और केंद्र सरकार द्वारा जारी जानकारी में जिक्र ही नहीं है। यही वजह है कि लोग अपने घरों में ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उसका तरीका उन्हें नहीं पता होता है। कई बार ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होने से मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का प्रतिशत बढ़ जाता है जो जानलेवा हो सकता है। इसके अलावा कई बार अचानक ऑक्सीजन बंद कर देने से ऑक्सीजन का मानक स्तर कम हो जाता है और मरीज की जान जाने की संभावना बनी रहती है। बिना जानकारी न करें ऑपरेट क्रिटिकल केयर मेडिसिन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डॉ वेद प्रकाश बताते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर को ऑपरेट करना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया आम आदमी के लिए तब सामान्य होती है जब उसको ऑपरेट करने की पूरी जानकारी हो। डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि एक सर्वे में पता चला कि हम आइसोलेशन में 90 फीसदी से ज्यादा लोग ऑक्सीजन सिलेंडर को चलाने में तकनीकी तौर पर दिक्कतों का सामना करते हैं।

डॉक्टर फिर बताते हैं कि लोग अपने घरों में ऑक्सीजन सिलेंडर तो मंगा लेते हैं लेकिन जब उसको मरीज को देते हैं तो ऑक्सीजन लेवल कितना होना चाहिए और किस तरीके से ऑक्सीजन लेवल मेंटेन किया जाना चाहिए इसकी तकनीकी जानकारी नहीं होती है। नतीजतन कई बार मरीजों का ऑक्सीजन लेवल ज्यादा हो जाता है। या कई बार मरीजों को ऑक्सीजन लेवल पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। वह कहते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर घर पर रखना और उसको बगैर जानकारी के ऑपरेट करना मुश्किल भरा होता है।  

ऐसे करे ऑक्सीजन सिलेंडर को ऑपरेट सबसे पहले मरीज का ऑक्सीजन लेवल चेक करें। अगर मरीज का ऑक्सीजन लेवल 94 से कम है, तो आप ऑक्सीजन रिलीज करने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की नॉब को सिलेंडर के साथ में लगे वाटर बॉटल के एक नंबर से तीन नंबर (लीटर) प्रेशर से ऑक्सीजन रिलीज करें। मरीज की उंगली में ऑक्सीमीटर लगा होना चाहिए। ऑक्सीजन देने से पहले मरीज का ऑक्सीजन लेवल ऑक्सीमीटर में जांच लें। जैसे ही ऑक्सीजन मरीज के मास्क से शरीर में जानी शुरू होगी ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ता जाएगा। ऑक्सीजन देने के साथ ऑक्सीमीटर में जैसे ही ऑक्सीजन की मात्रा 94 पर पहुंचती है, तो चेक करें कि कितने प्रेशर से ऑक्सीजन रिलीज करने पर लेवल 94 पर पहुंचा है। उदाहरण के तौर पर अगर तीन नंबर के प्रेशर के साथ ऑक्सीजन लेवल 94 पर पहुंचा है, तो दस मिनट बाद ऑक्सीजन प्रेशर का आधा से एक पॉइंट तक कम करके ऑक्सीजन का लेवल 94 पर चेक करें। ऐसे ही ऑक्सीजन प्रेशर से ऑक्सीजन लेवल को चेक करते रहें। डॉ वेद के मुताबिक जो दवाएं होम आइसोलेशन में मरीजों को चिकित्सक बताते हैं, उसके अलावा कोई भी दवाएं लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं होता है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करके ही दबाव में बदलाव करें।

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https://www.amarujala.com/india-news/if-you-are-in-home-isolation-due-to-coronavirus-then-know-how-to-use-oxygen-cylinder-at-home?src=fb_share